कोशिका (Cell) की संरचना एवं कार्य

कोशिका (Cell) क्या है?

उत्तर – कोशिका (Cell) सभी जीवों की संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई है। सभी जीव कोशिकाओं से बने होते हैं। इनमें कुछ जीव एक कोशिकीय तो बहुत सारे जीव बहुकोशिकीय होते हैं।

कोशिका (Cell) की खोज
:-

  • Robert Hooke (1665) – कॉर्क की पतली स्लाइड में मृत कोशिकाएँ देखीं और उन्हें “Cells” नाम दिया।
  • Antonie van Leeuwenhoek – पहली बार जीवित कोशिकाएँ देखीं।
  • Robert Brown (1831) – केंद्रक का खोज किया।

कोशिका सिद्धांत (Cell Theory) :-

1838 में जर्मन वनस्पति वैज्ञानिक मैथियस स्लाइडेन (Matthias Schleiden) तथा 1839 में ब्रिटिश प्राणि वैज्ञानिक थियोडोर श्वान (Theodor Schwann) — कोशिका सिद्धांत दिया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • सभी जीव कोशिकाओं तथा कोशिका उत्पादों से बने हैं।
  • कोशिका जीवन की मूल इकाई है।
  • 1855 में रडोल्फ विर्चो ( Rudolf Virchow) का संशोधन“Omnis cellula e cellula”नई कोशिका पुरानी कोशिका से बनती है।

कोशिका (Cell) की आकृति :-

  • सबसे छोटी कोशिका → Mycoplasma (0.3 माइक्रोमीटर)
  • जीवाणु (bacteria) → 3 – 5 माइक्रोमीटर
  • PPLO ( Pleuro Pneumonia-Like Organism) → 0.1 माइक्रोमीटर
  • Virus → सजीव तथा निर्जीव के बीच कड़ी (0.02 – 0.2 माइक्रोमीटर)
  • मानव RBCs → 7 माइक्रोमीटर
  • सबसे बड़ी जंतु कोशिका → शुतुरमुर्ग का अंडा (12 – 15 cm)
  • सबसे लंबी जंतु कोशिका → तंत्रिका कोशिका (Neuron) – 1 मीटर से अधिक।
  • कोशिकाएँ बहुभुजी, स्तम्भी, धागे, घनाभ, गोलाकार तथा अनियमित आकृति के होते हैं।
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कोशिका (Cell) के मुख्य भाग :-

  1. कोशिका झिल्ली (Cell membrane)
  2. कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm)
  3. केंद्रक (Nucleus)

प्रोकैरियोटिक कोशिका (Prokaryotic Cell) :-

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विशेषताएँ –

  • वास्तविक नाभिक अनुपस्थित।
  • झिल्ली-बद्ध कोशिकांग जैसे – Mitochondria, Plastids, Lysosome, ER, Golgi body अनुपस्थित।
  • DNA नग्न अवस्था में होता है।
  • आकार छोटा होता है।
  • 70S राइबोसोम उपस्थित।
  • कोशिका आवरण (Cell Envelope) – तीन परतें होती हैं:

(i) Glycocalyx – सबसे बाहरी परत, सुरक्षा प्रदान करती है

(ii) Cell Wall – पेप्टिडोग्लाइकैन से बनी, आकार तथा मजबूती देती है

(iii) Plasma Membrane -चयनात्मक पारगम्य (Selective permeable)

  • मेसोसोम (Mesosome) – यह प्लाज्मा झिल्ली का अंतर्वलन है।

कार्य – कोशिका भित्ति निर्माण, DNA प्रतिकृति तथा श्वसन।

  • फ्लैजेला (Flagella) – तीन भाग: Filament, HookBasal एवं Body

कार्य – गति में सहायता

  • पिली एवं फिम्ब्रिया – Pili संयुग्मन में सहायक तथा Fimbriae सतह से चिपकने में सहायता करता है।
  • राइबोसोम – प्रोटीन संश्लेषण का स्थान, 70S प्रकार का होता है।

उदाहरण: बैक्टीरिया, सायनोबैक्टीरिया, माइकोप्लाज्मा

यूकैरियोटिक कोशिका (Eukaryotic Cell) :-

चित्र – पादप कोशिका (Cell)

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चित्र – जंतु कोशिका (Cell)।

विशेषताएँ –

  • स्पष्ट केंद्रक उपस्थित।
  • झिल्ली-बद्ध कोशिकांग (Cell Organelles) जैसे – केंद्रक, लाइसोसोम, ER, गोल्जिकाय, माइटोकोंड्रिया, लवक आदि उपस्थित।
  • 80S राइबोसोम उपस्थित।

उदाहरण: पादप,जन्तु, कवक, प्रोटिस्ट

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कोशिका झिल्ली (Cell Membrane) :-

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चित्र – कोशिका झिल्ली का तरल मोजाइक मॉडल (Fluid Mosaic Model)।

  • कोशिका झिल्ली का सुंदर नमुना (model) 1972 में Singer और Nicolson द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
  • सबसे स्वीकृत / मान्यता प्राप्त मॉडल है।
  • संरचना – लिपिड द्विस्तर (Lipid bilayer) तरल में प्रोटीन अणु धंसे होते हैं।
  • फास्फोलिपिड बाइलेयर झिल्ली को तारल्य (fluid) और प्रत्यास्थता (elasticity) देता है।
  • कोशिका झिल्ली में कुछ मात्रा में कार्बोहाइड्रेट भी पाए जाते हैं।
  • कार्य – 1. चयनित पदार्थों का आवागमन सहायक होती है। ऐसे पारगम्यता (चयनात्मक पारगम्य) के कारण प्लाजमा झिल्ली /कोशिका झिल्ली को चयनात्मक पारगम्य झिल्ली (selective permeable membrane) कहते हैं।

2. कोशिका (Cell) की सुरक्षा करती है।

झिल्ली परिवहन : –

1. निष्क्रिय परिवहन – पदार्थों के परिवहन धीमी गति से होती है। ATP ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होती है।

उदाहरण –

(i) विसरण (Diffusion) – उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर गैसीय तथा द्रव पदार्थो की गति करने की प्रक्रिया है।

(ii) परासरण (Osmosis) – एक विसरण है, जिसमें जल की अर्धपारगम्य झिल्ली से संचरण होती है।

2. सक्रिय परिवहन (Active Transport) – पदार्थों के परिवहन की तेजी से होने वाली प्रक्रिया है। ATP ऊर्जा की आवश्यकता होती है ।

कोशिका भित्ति (Cell Wall): –

  • कोशिका (Cell) का बाहरी मृत भाग।
  • पादप, कवक तथा जीवाणु कोशिकाओं में उपस्थित किंतु जंतु कोशिका तथा माइकोप्लाज़मा में अनुपस्थित।
  • संरचना – Cellulose (मुख्य घटक), Hemicellulose तथा Pectin की बनी होती है।
  • पादप कोशिका की कोशिका भिति Cellulose, कवक की Chitin तथा जीवाणु की Peptidoglycan की बनी होती है।

कार्य – आकार देना, सुरक्षा तथा यांत्रिक मजबूती प्रदान करना।

कोशिका भित्ति की परतें –

  • मध्य पटलिका (Middle Lamella) – सबसे बाहरी, सबसे कठोर तथा पेक्टिन युक्त । कोशिकाओं के बीच सीमेंट / चिपकान का कार्य।
  • Primary Wall – मध्य पटलिका ( Middle Lamella) के ठीक अंदर। Cellulose, hemicellulose तथा pectin युक्त। कोशिकाओं को फैलने (expand) में मदद करती है।
  • द्वितीय भिति (Secondary Wall) – सबसे अंदर। लिग्निन (Lignin),और सुबेरिन युक्त। मजबूती और कठोरता प्रदान करना।

एंडोमेम्ब्रेन तंत्र (Endomembrane System) : –

इसमें शामिल हैं: Endoplasmic Reticulum,Golgi Apparatus, Lysosome, Vacuole

एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (ER): –

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  • झिल्लीदार नलिकाओं के जाल होते हैं।
  • अंतः प्रद्रव्ययी जालिका (ER) तीन भिन्न संरचनाओं से मिलकर बनी होती है।

1. सिस्टर्नी(Cisternae) – चपटी एवं समानांतर नलिकाएँ।

2. पुटिका (Vesicle) – थैलिनुमा अंडाकार रचना।

3. नलिकाएँ (Tubule) -पुटिका तथा सिस्टर्नी से अलग-थलग और शाखित संरचना हैं।

ER के प्रकार (Type) :-

(A) Rough ER – राइबोसोम उपस्थित होता है।

कार्य – प्रोटीन संश्लेषण करना।

(B) Smooth ER – राइबोसोम अनुपस्थित होता है।

कार्य

  • कार्बोहाइड्रेट तथा वसा संश्लेषण, विषहरण।
  • पदार्थों का विनिमय करना तथा कोशिका ढांचा तैयार करना

गोल्जीकाय (Golgi Apparatus) :-

  • Camillo Golgi (1898) द्वारा खोजा गया।
  • निर्माण – ER से होता है।
  • संरचना – चपटी थैलियों (Cisternae) का समूह।
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चित्र – गोल्जीकाय / गोल्जी उपकरण।

  • भाग – Cis face तथा Trans face

कार्य – पैकेजिंग, कोशिका स्राव, ग्लाइको प्रोटीन, ग्लाइको लिपिड तथा लाइसोसोम का निर्माण करना।

लाइसोसोम (Lysosome) :-

विशेषताएँ –

  • एक झिल्ली से घिरी पुटिका / थैली जैसी संरचना होती है।
  • निर्माण – गोल्जिकाय से होती है।
  • हाइड्रोलाइटिक एंजाइम जैसे – हाइड्रोलेजेज, प्रोटीएज, न्यूक्लिएज, कर्बोहाइड्रेजेज आदि उपस्थित। सभी एंजाइम्स अम्लीय होते हैं।
  • “Suicidal Bags” कहलाते हैं क्योंकि फटने पर अपने ही कोशिका को पाचित कर देते हैं।

कार्य – अंतः पाचन, पुराने कोशिकांगों का नाश।

रिक्तिका / रसधानी (Vacuole) :-

  • पादप कोशिका में बड़ी केंद्रीय रिक्तिका (कोशिकीय आयतन का 90% तक) पाई जाती है।
  • झिल्ली -Tonoplast कहलाती है।
  • रसधानी के अंदर जल, रस, उत्सर्जित पदार्थ, अन्य पदार्थ जो कोशिका के लिए उपयोगी नहीं है, वे सब मिलते हैं।
  • अमीबा में संकुचनशील रसधानी (Contractile vacuole) उत्सर्जन के लिए तथा खाद्य रसधानी (food vacuole) भोजन पकड़ने में सहायक होते हैं।

कार्य – जल संग्रह, turgiidity बनाए रखना

माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria):-

  • खोज (Discovery) – माइटोकॉन्ड्रिया का वर्णन सर्वप्रथम Richard Altmann ने किया था। बाद में Carl Benda ने इन्हें “Mitochondria” नाम दिया।
  • आकार एवं आकृति – सामान्यतः छड़ (Rod), गोलाकार (Spherical) या तंतु (Filamentous) आकार के होते हैं।
    आकार लगभग 0.2–1.0 µm व्यास तथा 1–4 µm लंबाई का होता है।
  • संख्या कोशिका की ऊर्जा आवश्यकता पर निर्भर करती है। पादप कोशिका से जंतु कोशिका में इसकी संख्या अधिक होती है।


माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना :-

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  • माइटोकॉन्ड्रिया दोहरी झिल्ली (Double Membrane) से घिरा होता है।

1. बाह्य झिल्ली (Outer Membrane)चिकनी होती है।अर्ध-पारगम्य होती है।छोटे अणुओं को अंदर-बाहर जाने देती है।

2. आंतरिक झिल्ली (Inner Membrane) अत्यधिक मुड़ी हुई होती है।इसके वलनों को क्रिस्टी (Cristae) कहते हैं। यह श्वसन एंजाइमों तथा ATP निर्माण तंत्र को धारण करती है।

क्रिस्टी का महत्व –

  • सतह क्षेत्रफल बढ़ाती हैं।
  • अधिक ATP उत्पादन में सहायता करती हैं।

मैट्रिक्स (Matrix) –

  • मैट्रिक्स में पाए जाते हैं : द्विलड़ी वृताकार DNA, RNA, 70S राइबोसोम, एंजाइम, कैल्शियम एवं फॉस्फेट आयन

माइटोकॉन्ड्रिया का कार्य –

  1. कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration) –
    भोजन के ऑक्सीकरण द्वारा ऊर्जा प्राप्त की जाती है।
  2. ATP का निर्माण –
    ATP कोशिका (Cell) की ऊर्जा मुद्रा (Energy Currency) कहलाती है। माइटोकॉन्ड्रिया में ATP Synthase एंजाइम द्वारा ATP बनता है।
  3. ऊर्जा का भंडारण –
    भोजन से प्राप्त ऊर्जा ATP में संग्रहीत रहती है और आवश्यकता पड़ने पर उपयोग होती है।

प्रश्न – माइटोकॉन्ड्रिया को “Powerhouse” क्यों कहते हैं?

उत्तर – कोशिका (Cell) की अधिकांश ATP यहीं बनती है।
ATP सभी जैविक क्रियाओं के लिए ऊर्जा प्रदान करती है।
ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। इसलिए इसे कोशिका (Cell) का ”Powerhouse” कहते हैं।

प्लास्टिड (Plastids) :-

केवल पादप कोशिका में पाई जाती है।

प्रकार (Types) –

(i) Chloroplast -हरे रंग की होती है। इसमें प्रकाश संश्लेषण होती है। इसे कोशिका का रसोई घर (किचेन) कहते हैं।

(ii) Chromoplast- विभिन्न रंगों में होती है।फूल तथा फल में रंग प्रदान करती है।

(iii) Leucoplast – रंगहीन। मुख्य रूप से जड़ों मे मंड, प्रोटीन, वसा आदि के रूप में भोजन संग्रह करती है।

क्लोरोप्लास्ट की संरचना :-

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  • गोलाकार, चक्री जैसी, फीतानुमा होती है।
  • मुख्य रूप से पौधों की पतियों में पाई जाती है।
  • दोहरी झिल्ली से घिरी होती है।
  • घटक – Grana, Stroma तथा Thylakoid
  • स्ट्रोमा – भितरी स्थान को स्ट्रोमा कहते हैं, जिसमें चपटी थाइलेकोइड होती है। स्ट्रोमा में द्विलड़ी वृताकार DNA, Ribosome (70S), RNA के साथ प्रोटीन तथा carbohydrates का संश्लेषण करने वाले एंजाइम्स भी मिलते हैं।
  • Thylakoid – स्ट्रोमा में चपटी सिक्के जैसी थाइलेकोइड होती है।
  • ग्रेना (grana) – थाइलेकोइड सिक्के की ढेर को ग्रेना (grana) कहते हैं जो प्रकाश संश्लेषण का स्थान होता है।
  • पर्णहरित (क्लोरोफिल) तथा केरोटीनॉइड वर्णक उपस्थित जो प्रकाश संश्लेषण में भाग लेते हैं।
  • क्लोरोफिल – a, b, c, d तथा e प्रकार के होते हैं। इनमें a तथा b प्रमुख है।

राइबोसोम (Ribosome) :-

  • इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखा गया सूक्ष्म कनिकामय रचना।
  • खोज — जॉर्ज पैलेड (1953) ने।
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  • RNA तथा प्रोटीन की बनी झिल्ली विहीन रचना।
  • यूकैरियोटिक कोशिका में 80S तथा प्रोकैरियोटिक कोशिका में 70S प्रकार, जहाँ S स्वेडवर्ग इकाई है जो घनत्व तथा आकार को व्यक्त करता है।
  • 80S (60S एवं 40S) तथा 70S (50S एवं 30S) छोटे बड़े दो उप इकाइयों (sub units) से बने होते हैं।

कार्य – प्रोटीन संश्लेषण

कोशिकीय कंकाल(Cytoskeleton) : –

  • कोशिका द्रव्य में फैले जालिकावत तंतु (filament like network) होता है।
  • घटक – Microtubules,Microfilaments तथा Intermediate filaments.

कार्य – आकार देना, गति प्रदान तथा कोशिका विभाजन में भाग लेना।

सिलिया एवं फ्लैजेला :-

  • प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक में झिल्ली से घिरी लंबी संरचना होती है।
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चित्र – microtubule का अनुप्रस्थ काट।

  • संरचना – 9 परिधीय युग्म + 2 केंद्रीय सूक्ष्म नलिकाएँ (microtubules) होते हैं।

कार्य – गति प्रदान तथा Axoneme का निर्माण करना।

तारककाय / सेंट्रोसोम एवं सेंट्रिओल :-

  • दो बेलनाकार – तारककेंद्र (Centroles) से मिलकर बने होते हैं। दोनों तारककेंद्र एक दूसरे के लंबवत (right angle) होते हैं।
  • मुख्यतः जन्तु कोशिका में उपस्थित।
  • संरचना – 9 त्रिक सूक्ष्म नलिकाओं (microtubules) के बने होते हैं।

कार्य – स्पिंडल तंतु निर्माण, कोशिका विभाजन में सहायक।

केंद्रक / नाभिक (Nucleus): –

  • कोशिका का नियंत्रण केंद्र है।
  • प्रत्येक कोशिका (Cell) में सामान्यतः एक केंद्रक किंतु स्तनधारी के WBC तथा पौधों के चालनी नलिका में एक से अधिक केंद्रक होते हैं।

भाग / घटक –

(i) Nuclear Envelope – दोहरी झिल्ली। बाहरी झिल्ली राइबोसोम तथा ER से जुड़ी होती है। Nuclear pores उपस्थित।

(ii) Nucleoplasm – केंद्रक द्रव्य में केंद्रिका तथा cromatin उपस्थित।

(iii) Nucleolus – झिल्ली विहीन गोलाकार संरचना।

कार्य- rRNA तथा Ribosome का संश्लेषण।

(iv) Chromatin – नाम दिया फ्लेमिंग ने। DNA + Protein का बना होता है। कोशिका विभाजन के समय गुणसूत्र (क्रोमोसोम) में परिवर्तित।

गुणसूत्र (Chromosomes): –

  • प्रत्येक क्रोमोसोम के प्राथमिक संकुचन को Centromere कहते हैं।
  • इस पर स्थित बिंब अकार की रचना को काइनेटोकोर कहते हैं।

Centromere के आधार पर क्रोमोसोम के प्रकार –

  1. Metacentric – centromere मध्य भाग
  2. Sub-metacentric – centromere से हटकर
  3. Acrocentric – centromere किनारे पर
  4. Telocentric – centromere शीर्ष पर।
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सूक्ष्मकाय (Microbodies): –

  • छोटी झिल्ली-बद्ध संरचनाएँ।
  • विभिन्न एंजाइम्स उपस्थित।
  • पौधों तथा जंतुओं में पाई जाती है।

उदाहरण – Peroxisome, Glyoxysome

प्रोकैरियोटिक एवं यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर: –

प्रोकैरियोटिक कोशिका यूकैरियोटिक कोशिका

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पादप तथा जंतु कोशिका में अंतर :-

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महत्वपूर्ण MCQs

1. कोशिका (Cell) की खोज किसने की?

उत्तर: Robert Hooke

2. नाभिक की खोज किसने की?

उत्तर: Robert Brown

3. कोशिका (Cell) का पावर हाउस?

उत्तर: Mitochondria

4. प्रोटीन संश्लेषण कहाँ होता है?

उत्तर: Ribosome

5. “Suicidal Bag” किसे कहते हैं?

उत्तर: Lysosome

6. Fluid Mosaic Model किसने दिया?

उत्तर: Singer एवं Nicolson

7. 70S राइबोसोम कहाँ पाए जाते हैं?

उत्तर: प्रोकैरियोट में

8. कोशिका भित्ति का मुख्य घटक?

उत्तर: Cellulose

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