मानव नेत्र का सचित्र वर्णन, नेत्र की कार्य-प्रणाली तथा समंजन क्षमता!

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31/12/2022 Vinod 0 Comments

मानव नेत्र (Human Eye) :-

मानव नेत्र एक प्राकृतिक प्रकाशिक यंत्र है जिसके द्वारा हम किसी वस्तु को प्रकाश की उपस्थिति में देख सकते हैं। यह आकार में लगभग गोलीए होता है जो खोपड़ी के एक गड्ढे में मांसपेशियों की सहायता से जुड़े होते है। इस गोलाकार प्रकाशबद्ध प्रकोष्ठ को नेत्र गोलक (eye ball) कहते हैं।

नेत्र का सचित्र वर्णन कीजिए
चित्र 1 :- मानव नेत्र की सरंचना ।

मानव नेत्र के निम्नांकित भाग होते हैं –

1. दृष्ढ पटल (sclerotic) :-

नेत्र गोलक के ऊपरी मोटे और सफेद अपारदर्शी आवरण को दृष्ढ पटल या स्क्लेरोटिक कहा जाता है।

2. कॉर्निया (cornea) :-

नेत्र गोलक के सामने वाली केंद्रीय पारदर्शी परत को कॉर्निया कहा जाता है। यह नेत्र के अन्य भागों की अपेक्षा अधिक उभरा हुआ (उतल) होता है। प्रकाश की किरणें इसी भाग से होकर नेत्र के अंदर जाती है।

3. कोरॉइड (choroid) :-

दृढ़ पटल (sclerotic) के नीचे अंदर की ओर गहरे भूरे रंग की एक झिल्ली होती है जिससे choroid कहते हैं। यह अपने गाढ़े रंग के कारण नेत्र के प्रकाश को अवशोषित कर लेता है। इसके द्वारा किसी प्रकार का आंतरिक परावर्तन नष्ट हो जाता है।

4. आइरिस (iris) :-

यह भाग कॉर्निया के पीछे अपारदर्शी डायाफ्राम के रूप में होता है जिसके अभिमुख से प्रकाश नेत्र के भीतर जाता है। इस अभिमुख को पुतली (pupil) कहा जाता है। आइरिस की सहायता से आंख के लेंस से होकर जाने वाले प्रकाश का परिमाण घटाया या बढ़ाया जा सकता है। अंधेरे में पुतली स्वतः फैल जाती है और उजाले में सिकुड़ जाती है।

5. नेत्र लेंस (eyelens) :-

पुतली के नीचे जिलेटिन जैसे पारदर्शक तथा मुलायम पदार्थ का बना हुआ एक उत्तल लेंस होता है जिसे नेत्र लेंस या स्फटिक लेंस कहा जाता है। यह ठीक डयाफ्राम के पीछे लटकने वाले बंधन (suspensory ligaments) नामक कुछ रेसों से सिलियरी मांसपेशी की भीतरी सतह से लटका हुआ रहता है।

नेत्र लेंस द्विउत्तल (double convex) होता है तथा इसके बाहर वाले तल की वक्रता त्रिज्या अधिक तथा अंदर वाले तल की वक्रता त्रिज्या कम होती है। मांसपेशियों की सहायता से लेंस को थोड़ा सा मोटा या पतला करके नेत्र लेंस की फोकस दूरी में अल्प परिवर्तन किया जा सकता है।

6. काचाभ द्रव (vitreous humor) :-

नेत्र लेंस नेत्र गोलक को दो भागों में बांट देता है। अग्र भाग में नेत्र-रस (aqueous humor) तथा पश्च भाग में काचाभ द्रव (vitreous humor) भरा रहता है। ये द्रव पारदर्शी, रंगहीन और श्यान (viscous) होता है।

7. दृष्टि पटल (retina) :-

कोरॉइड के भीतरवाले पिछले भाग पर एक अर्द्धपारदर्शी, सूक्ष्मग्राही परत (sensitive layer) स्थित होती है, जिसे दृष्टि पटल या रेटिना कहते हैं। यह रक्तकोशिकाओं की बनी होती है।

रेटिना की भीतरी सतह पर एक गोल पीला धब्बा होता है जिसे पीत बिंदु (yellow spot) करते हैं। पीत बिंदु के केंद्र में मध्य गर्त नामक एक छोटा गड्ढा होता है जो रेटिना का सबसे अधिक सूक्ष्मग्राही भाग होता है।

रेटिना के जिस स्थान पर प्रकाश तंत्रिका (optic nerve) प्रवेश करती है, वह स्थान प्रकाश के लिए संवेदी (sensitive) नहीं होता है। यह स्थान आंख का अंध बिंदु (blind spot) कहलता है।

मानव नेत्र की कार्य प्रणाली (working of human eye) :-

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चित्र 2 :- मानव नेत्र द्वारा प्रतिबिंब का बनना।

किसी वस्तु से आने वाली किरणें जब आंख पर पड़ती है तब कॉर्निया तथा नेत्र लेंस से अपवर्तन के बाद वह रेटिना पर पहुंचती है जहां पर वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिंब बनता है। रेटिना पर वस्तु का उलटा प्रतिबिंब (inverted image) बनता है परंतु मस्तिष्क में सीधी वस्तु देखने की संवेदना होती है।

मानव नेत्र की समंजन क्षमता (power of accommodation) :-

नेत्र लेंस में परिवर्तन सिलियरी मांसपेशियों के तनाव के घटतने- बढ़ने से होता है। नेत्र लेंस की इस प्रकार आवश्यकतानुसार अपने फोकस दूरी को परिवर्तित करके प्रतिबिंब को रेटिना पर बनाने की क्षमता को मानव नेत्र की समंजन क्षमता (power of accommodation) करते हैं।

जब दूर की वस्तु देखी जाती है तब नेत्र लेंस की फोकस दूरी अधिक रहती है और इस स्थिति में सिलयारी मांसपेशी में तनाव कम रहता है। जब वस्तु आंख के निकट रहती है तब उसका प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनना चाहता है। किंतु आंख अपने लेंस की फोकस दूरी को घटाकर प्रतिबिंब रेटिना पर बना देती है।

स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (least distance of distinct vision) :-

नेत्र और निकट बिंदु (near point ) के बीच की दूरी को स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी कहते हैं। इसे सामान्यतः D से निरूपित किया जाता है।

सामान्य नेत्र के लिए निकट बिंदु (near point) 25 सेंटीमीटर के लगभग होता है। सामान्य नेत्र 25 सेंटीमीटर से लेकर अनंत तक की दूरी पर स्थित वस्तु को देख सकती है।

जिस अधिकतम दूरी तक नेत्र वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख सकती है उसे नेत्र का दूर बिंदु कहा जाता है। सामान्य नेत्र के लिए दूर बिंदु (far point) अनंत पर माना जाता है।

जिस न्यूनतम दूरी तक नेत्र वस्तु को स्पष्ट रूप से देख सकती है उससे नेत्र का निकट बिंदु (near point) कहा जाता है।

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