प्रकाश का परावर्तन, प्रतिबिंब तथा उसका प्रकार का वर्णन !

13/06/2022 Vinod 0 Comments

प्रकाश का परावर्तन (Reflection of light) :-

किसी समांगी माध्यम में प्रकाश की किरणें सरल रेखा में गमन करती है। ये किरणें जब किसी अन्य समांगी माध्यम की सतह पर आपतित होती है तब प्रकाश का कुछ भाग पहले माध्यम में ही निश्चित दिशा में लौट जाती है। इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहा जाता है।

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चित्र 1 :- समतल दर्पण द्वारा प्रकाश का परावर्तन।

उपर्युक्त चित्र में M₁M₂ एक समतल दर्पण है जिसके किसी बिंदु B पर आपतित किरण AB, परावर्तन के कारण BC, दिशा में लौट जाती है। दर्पण के आपतन बिंदु B पर खींचा गया अभिलंब (normal) BN है। AB को आपतित किरण (incidence Ray), BC को परावर्तित किरण (reflected Ray) तथा बिंदु B को आपतन बिंदु (point of incidence) कहा जाता है।

आपतित किरण तथा अभिलंब के बीच के कोण ABN को आपतन कोण i तथा परावर्तित किरण एवं अभिलंब के बीच के कोण NBC को परावर्तन कोण (angle of reflection) r कहा जाता है। आपतित किरण तथा अभिलंब से संबंध तल को आपतन का तल (plane of incidence) कहा जाता है।

प्रकाश का परावर्तन नियम (Law of reflection of light) :-

प्रकाश का परावर्तन निम्नलिखित नियमों के अनुसार होती है।

(1) आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा समतल पृष्ठ के आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब, तीनों एक ही समतल में होते हैं।

(2) आपतन कोण (i) हमेशा परावर्तन कोण के बराबर होता है।

पहले नियम के अनुसार AB,BC तथा BN तीनों एक ही समतल ‘ आपतन के तल ‘ में होते हैं।

दूसरे नियम के अनुसार,

आपतनन कोण (i) = परावर्तन कोण (r)

प्रतिबिंब (Image) :-

यदि किसी बिंदु से आता हुआ किरण-पुंज परावर्तन अथवा अपवर्तन के बाद किसी दूसरे बिंदु पर अभिसृत (converge) होती है, अर्थात किरणें यथार्थ रूप से कटती है या किसी दूसरे बिंदु से अपसृत (diverge) होती हुई प्रतीत होती है, अर्थात किरणों को पीछे बढ़ाने पर ये एक बिंदु पर कटती हो, तो दूसरे बिंदु को पहले बिंदु का प्रतिबिंब (image) कहते हैं।

किसी वस्तु का प्रतिबिंब वस्तु के विभिन्न बिंदुओं के संगत के प्रतिबिंब-बिंदुओं का समूह होता है।

प्रतिदिन का रूप वस्तु जैसा ही होता है, परंतु उसका आकार वस्तु के आकार से भिन्न हो सकता है।

प्रतिबिंब के प्रकार (types of image) :-

यह निम्नांकित दो प्रकार के होते हैं।

(a) वास्तविक प्रतिबिंब (Real image) :-

किसी बिंदु से आने वाली किरणें परावर्तन अथवा अपवर्तन के बाद जब किसी बिंदु पर अभिसृत होती है, तो इस प्रकार से बने प्रतिबिंब को वास्तविक प्रतिबिंब कहते हैंं।

वास्तविक प्रतिबिंब हमेशा उल्टा होता है और इससे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है।

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चित्र 2 :- उत्तल लेंस तथा अवतल दर्पण द्वारा बना वास्तविक प्रतिबिंब।

(b) आभासी या अवास्तविक प्रतिबिंब (virtual image) :-

किसी वस्तु से आनेवाली किरणें परावर्तन अथवा अपवर्तन के बाद किसी दूसरे बिंदु से अपसृत होती हुई प्रतीत होती हो, तो इस प्रकार बने प्रतिबिंब को आभासी या काल्पनिक प्रतिबिंब कहते हैं।

आभासी प्रतिबिंब हमेशा सीधा होता है और इसे

पर्दे पर नहीं प्राप्त किया जा सकता है।

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चित्र 3 :- अवतल लेंस तथा उत्तल दर्पण द्वारा बना काल्पनिक प्रतिबिंब।

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