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डीएनए प्रतिकरण के मत क्या क्या हैं। डीएनए प्रतिकरण के अर्धसंरक्षी मत के बारे में बताएं।

डीएनए प्रतिकरण के मत :- (1). विक्षेपक मत (Dispersive theory) :- (2). संरक्षी मत (Conservative theory) :- (3). अर्धसंरक्षी मत (Semiconservative theory) :- इस मत को सिद्ध करने के लिए मैथ्यू स्टैनली मेसेल्सन तथा फ्रैंकलिन विलियन स्टाल के प्रयोग और टेलर के प्रयोग का वर्णन निम्नलिखित है :– मेसेल्सन तथा स्टाल के प्रयोग :– टेलर…

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डाउन्स सिंड्रोम (Down’s Syndrome) तथा क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinfelter’s Syndrome) क्या होते है?

डाउन्स सिंड्रोम (Down’s Syndrome) :- जब किसी मनुष्य के 21वें जोड़े गुणसूत्र में एक गुणसूत्र की वृद्धि हो जाती है तब उस मनुष्य के अंदर डाउन्स सिंड्रोम नामक रोग उत्पन्न हो जाती है। क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinfelter’s Syndrome) :-

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गुणसूत्रीय विकार क्या है? टर्नर्स सिंड्रोम क्या होता है।

गुणसूत्रीय विकार (Chromosomal Disorders) :- मानव शरीर में पाए जाने वाले 23 जोड़े गुणसूत्र की संख्या या संरचना में किसी प्रकार के परिवर्तन हो जाने से गुणसूत्रीय विकार उत्पन्न होता है। टर्नर्स सिंड्रोम :- जब मनुष्य के द्विगुणित गुणसूत्रों की संख्या में से एक की कमी हो जाती है तब टर्नर्स सिंड्रोम उत्पन्न होता है।…

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Sickle cell disease Nurses need better training says health union

मेंडेलीय विकार क्या है। हिमोफिलिया क्या है। वर्णांधता क्या है। तथा सिकल-सेल एनेमिया क्या होता है।

मेंडेलीय विकार (Mendelian disorders):- एकल जीन के उत्परिवर्तन से मेंडेलीय विकार निर्धारित होता हैं। ऐसे विकार की वंशागति होती है। इसे वंशावली विश्लेषण द्वारा खोजा जा सकता है। हीमोफीलिया, वर्णांधता, सिकल-सेल एनीमिया, फिनाइलकिटोन्यूरिया आदि मेंडेलीय विकार इसके उदाहरण है। हिमोफिलिया (Haemophilia) :- यह एक लिंग सहलग्न अप्रभावी लक्षण वाले मेंडेलीय विकार हैं। ऐसे रोग के…

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उत्परिवर्तन किसे कहते है। उत्परिवर्तन कितने प्रकार के होते है?

उत्परिवर्तन :- किसी जीव के लक्षणों में अचानक होनेवाले परिवर्तन को उत्परिवर्तन (Mutation) कहते हैं। उत्परिवर्तन के प्रकार :- उत्परिवर्तन मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं :- (1) गुणसूत्रीय उत्परिवर्तन (Chromosomal mutation) :- गुणसूत्रों की संख्या तथा उनके संरचना में होने वाले परिवर्तन को गुणसूत्रीय उत्परिवर्तन या क्रोमोसोमल म्यूटेशन कहते हैं। (A) गुणसूत्र (Chromosome) की…

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मानव में लिंग निर्धारण कैसे होता है! (Sex determination in humans) :-

मानव में लिंग निर्धारण (Sex determination in humans) :- मानव के प्रत्येक कोशिका में 23 जोड़े गुणसूत्र पाए जाते हैं जिसमें 22 जोड़े को अलिंग गुणसूत्र (Autosomes) तथा अंतिम 23वें जोड़ा को लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes) कहते हैं। द्विगुणित अवस्था में मादा का लिंग गुणसूत्र XX तथा नर का लिंग गुणसूत्र XY होता है। मानव…

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क्राॅसिंग ओवर

क्रॉसिंग ओवर और क्रॉसिंग ओवर के महत्व के बारे मे बताएl

क्राॅसिंग ओवर (Crossing Over) वैसी प्रक्रिया जिसमें एक गुणसूत्र पर स्थित जीन्स का एक समूह समजात गुणसूत्र पर स्थित समान जीनों के समूह द्वारा स्थान परिवर्तन कर लेता है, उसे विनिमय या क्रॉसिंग ओवर कहते हैं। क्रॉसिंग ओवर का महत्व (Importance of Crossing Over) क्रॉसिंग ओवर के महत्व निम्नलिखित हैं :

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मेंडल की वंशागति नियमों के अपवाद क्या – क्या हैं! अपूर्ण प्रभाविता क्या है।सहप्रभाविता क्या है। बहुविकल्पता क्या है। तथा सहलग्नता क्या होता है।

मेंडल की वंशागति नियमों के अपवाद निम्नलिखित हैं (Exceptions to Mendel’s Law of Inheritance) :- अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete dominance) :- जब विपरीत लक्षणों के जोड़े में एक लक्षण दूसरे लक्षण पर प्रभावी न होकर एक दूसरे पर पूर्ण रूप से प्रभावी हो जाता है अर्थात दोनों अपने-अपने लक्षण को आंशिक रूप से प्रकट करते हैं…

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मेंडल की सफलता के कारण क्या थे?(Reasons for Mendel’s success)

मेंडल की सफलता के कारण निम्नलिखित थे (Reasons for Mendel’s success) :- 1. मटर के पौधे का चयन (Selection of pea plant) :- पादप जगत में पाए जाने वाले लाखों पौधों में मेंडल ने अपने प्रयोग के लिए केवल मटर के पौधे का ही चयन किया, क्योंकि मटर के पौधों में अनेक प्रकार के विपरीत…

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आनुवंशिकता (Heredity) क्या है। एकसंकर क्रॉस तथा द्विसंकर क्रॉस क्या है। आनुवंशिकता के नियम क्या क्या हैं। तथा आनुवंशिकता का क्रोमोसोम सिद्धांत का वर्णन करें।

आनुवंशिकता (Heredity) :- संतति में पैतृक लक्षणों के संचरण को आनुवंशिकता कहते हैं। यह संचरण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जनकों से युग्मको (gametes ) के द्वारा होता है। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संचारित होनेवाले लक्षण पैतृक लक्षण या आनुवंशिक लक्षण कहलाते हैं। जीव विज्ञान की जिस शाखा में माता-पिता तथा संतान…

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डीएनए प्रतिकरण की विधियां क्या क्या हैं। संतत एवं अर्धसंतत प्रतिकरण के बारे में बताएं।

डीएनए प्रतिकरण की विधियां (Methods of DNA Replication) :- डीएनए प्रतिकरण की विधियां निम्नलिखित हैं :– 1. प्रारंभन (Initiation) :- 2. कुंडली का खुलना (Unwinding of Helix) :- 3. प्राइमर स्ट्रैंड्स का निर्माण (Formation of Primer strands) :- 4. नए स्टैंड की लंबाई में वृद्धि (Elongation of new strand) :- संतत एवं अर्धसंतत प्रतिकरण (Continuous…

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